Article summary
Abstract
ग्रामीण बालिका शिक्षा भारत की शैक्षिक समानता, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण से सीधे जुड़ा
हुआ विषय है। राजस्थान जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण समाज में परंपरागत मान्यताएँ, आर्थिक सीमाएँ, विद्यालय
की दूरी, सुरक्षा संबंधी चिंता और बाल विवाह जैसी स्थितियाँ बालिकाओं की शिक्षा को प्रभावित करती रही हैं,
वहाँ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना विशेष महत्व रखती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सीकर जिला,
राजस्थान के संदर्भ में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की भूमिका का विश्लेषण करना है। अध्ययन में यह
देखा गया कि आवासीय विद्यालय व्यवस्था ने वंचित वर्ग की बालिकाओं को सुरक्षित शैक्षिक वातावरण, पोषण,
स्वास्थ्य, पुस्तक सामग्री, सहशैक्षणिक गतिविधियों और आत्मविश्वास निर्माण का अवसर दिया है। भारत सरकार
के समग्र शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का लक्ष्य सामाजिक और लैंगिक अंतर
को कम करते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीबी
रेखा से नीचे के परिवारों की बालिकाओं को कक्षा 6 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है (डपदपेजतल व
िम्कनबंजपवदए दण्कण्). राजस्थान में भी योजना के प्रवेश मानदंडों और निगरानी व्यवस्था में वंचित समुदायों की
बालिकाओं को प्राथमिकता दी गई है (त्ंरंेजींद ब्वनदबपस व िैबीववस म्कनबंजपवदए दण्कण्). अध्ययन से संकेत मिलता
है कि सीकर जिले में केजीबीवी बालिकाओं के नामांकन, नियमित उपस्थिति, आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और उच्च
शिक्षा की आकांक्षा को बढ़ाने में प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य कर रहे हैं। हालांकि अवसंरचना, पुस्तकालय,
डिजिटल संसाधन, करियर परामर्श और समुदायिक सहभागिता को अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
