Article summary
Abstract
डिजिटल युग ने भाषा, संचार और ज्ञान-वितरण की प्रकृति को मौलिक रूप से परिवर्तित कर दिया है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तीव्र विकास ने भारतीय भाषाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं, वहीं अनेक जटिल चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। यह शोधपत्र डिजिटल परिवेश में भारतीय भाषाओं की स्थिति का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि किस प्रकार डिजिटल तकनीक भारतीय भाषाओं के संरक्षण, प्रसार और आधुनिकीकरण में सहायक हो सकती है तथा किन तकनीकी, सामाजिक और नीतिगत अवरोधों के कारण उनका विकास प्रभावित हो रहा है। यह शोध वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें द्वितीयक स्रोतों पुस्तकों, शोधपत्रों, सरकारी दस्तावेज़ों और डिजिटल रिपोर्ट्स का उपयोग किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि यदि समुचित भाषा-नीति, तकनीकी निवेश और अकादमिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए, तो डिजिटल युग भारतीय भाषाओं के लिए संकट नहीं, बल्कि एक सशक्त अवसर सिद्ध हो सकता है।
