मनोरोग से ग्रसित रोगियों की देखभाल करने वालों में तनाव, चिंता एवं अवसाद का अध्ययन
डॉ0 विश्वजीत भारतीय, शिक्षक मनोविज्ञान, पी. एम. श्री बसंत 10+2उच्च विद्यालय, इतिम्हा कर्मा, ब्लॉक नासरीगंज, रोहतास (बिहार).
DOI: 10.64127/rnimj.2025v2i1008
DOI URL: https://doi.org/10.64127/rnimj.2025v2i1008
Published Date: 10 February 2025
Issue: Vol. 2 ★ Issue 1 ★ January-March 2026
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सारांश-:

यह अध्ययन मनोरोग से ग्रसित रोगियों की देखभाल करने वालों में तनाव, चिंता एवं अवसाद की स्थिति का विश्लेषण करने के उद्देश्य से किया गया है। मानसिक रोग केवल रोगी को ही नहीं, बल्कि उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति विशेषकर परिवार के सदस्य को भी गहरे स्तर पर प्रभावित करते हैं। दीर्घकालिक देखभाल, आर्थिक दबाव, सामाजिक कलंक, भावनात्मक संलग्नता तथा भविष्य की अनिश्चितता जैसे कारक देखभालकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि मनोरोगी रोगियों की देखभाल प्रक्रिया किस प्रकार देखभालकर्ताओं में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद को जन्म देती है तथा इन मनोवैज्ञानिक समस्याओं की तीव्रता किन सामाजिक-आर्थिक एवं पारिवारिक कारकों से प्रभावित होती है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध विधि का प्रयोग किया गया है। नमूने के रूप में मनोरोगी रोगियों की देखभाल करने वाले प्राथमिक देखभालकर्ताओं को शामिल किया गया है। तनाव, चिंता एवं अवसाद के आकलन हेतु मानकीकृत मनोवैज्ञानिक मापनी का उपयोग किया गया है। अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश देखभालकर्ता मध्यम से उच्च स्तर के तनाव का अनुभव करते हैं, जबकि चिंता एवं अवसाद के लक्षण भी उल्लेखनीय रूप से पाए गए हैं। विशेष रूप से वे देखभालकर्ता जो लंबे समय से रोगी की देखभाल कर रहे हैं, जिनके पास सामाजिक समर्थन सीमित है अथवा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनमें मनोवैज्ञानिक समस्याओं की संभावना अधिक पाई गई है। अतः यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि मनोरोगी रोगियों की देखभाल करने वालों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उनके लिए परामर्श सेवाएँ, सामाजिक समर्थन कार्यक्रम तथा तनाव प्रबंधन हस्तक्षेप विकसित किए जाने चाहिए, ताकि न केवल देखभालकर्ताओं की मानसिक स्थिति में सुधार हो, बल्कि रोगी की देखभाल की गुणवत्ता भी बेहतर बन सके।.

Keywords: मनोरोगी, सामाजिक समर्थन, दीर्घकालिक देखभाल, मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद।.