भारत में गरीबी उन्मूलन योजनाएँ सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न गरीबी उन्मूलन योजनाओं का आर्थिक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), सार्वजनिक वितरण प्रणाली, वित्तीय समावेशन, ग्रामीण विकास कार्यक्रम तथा महिला सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है। शोध से स्पष्ट होता है कि इन योजनाओं ने रोजगार सृजन, आय वृद्धि, खाद्य सुरक्षा तथा सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दिया है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य एवं मानवीय पूंजी के विकास में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और डेटा आधारित निगरानी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि भ्रष्टाचार, संसाधनों का असमान वितरण, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। शोध का निष्कर्ष है कि यदि योजनाओं की निरंतर निगरानी, मूल्यांकन एवं संरचनात्मक सुधार किए जाएँ, तो गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनाया जा सकता है। समावेशी विकास, वित्तीय सशक्तिकरण तथा सामाजिक न्याय के माध्यम से भारत गरीबी मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मुख्य शब्द: गरीबी उन्मूलन, मनरेगा, वित्तीय समावेशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक विश्लेषण.