पश्चिमी कोशी मैदान और प्राकृतिक आपदाएंः एक अध्ययन
डॉ0 अमित कुमार सिंह, पी-एच डी, भूगोल विभाग, बी. एन. एम. यू., मधेपुरा।.
DOI: 10.64127/rnimj.2025v1i2007
DOI URL: https://doi.org/10.64127/rnimj.2025v1i2007
Published Date: 20 December 2025
Issue: Vol. 1 ★ Issue 2 ★ October - December 2025
Published Paper PDF: Click here

सारांश-:

उत्तर बिहार गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी हिमालय - उत्पन्न नदियों की तराई में स्थित है और यह क्षेत्र देश के सबसे अधिक बाढ़- प्रवण इलाकों में गिना जाता है। दूसरी ओर, मानसूनी वर्षा की अनियमितता और बढ़ते तापमान ने यहाँ सूखे की आवृत्ति भी बढ़ा दी है। पिछले तीन दशकों में वर्षा के वितरण, मौसमी असमानताओं और चरम घटनाओं के आँकड़े यह संकेत देते हैं कि बाढ़ और सूखा दोनों की तीव्रता और पुनरावृत्ति में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य 1991 से 2024 तक की अवधि में उत्तर बिहार में बाढ़ और सूखे की घटनाओं की आवृत्ति का भौगोलिक मूल्यांकन करना है। इसके लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त वर्षा और तापमान आँकड़े, केंद्रीय जल आयोग और राज्य जल संसाधन विभाग के नदी प्रवाह आँकड़े, तथा उपग्रह- आधारित बाढ़ एटलस और राज्य स्तर पर तैयार सूखा आकलन का उपयोग किया गया है। विश्लेषण में ट्रेंड विश्लेषण, मानकीकृत वर्षा सूचकांक ;ैच्प्द्ध, और अधिकतम निर्वहन श्रृंखला जैसे सांख्यिकीय उपकरणों का प्रयोग किया गया है। अध्ययन से अपेक्षित परिणाम यह दर्शाते हैं कि उत्तर और पूर्वी जिलों में अल्प अवधियों में अतिवृष्टि और बाढ़ की संभावना बढ़ रही है, जबकि दक्षिण और पश्चिमी जिलों में वर्षा-घाटे और सूखा की पुनरावृत्ति अधिक स्पष्ट हो रही है। प्रस्तुत निष्कर्ष न केवल कृषि और सिंचाई प्रबंधन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, बल्कि आपदा-पूर्व तैयारी और जलवायु अनुकूलन नीतियों के लिए भी आधार प्रदान करते हैं।

मुख्य शब्द: उत्तर बिहार, जलवायु परिवर्तन, बाढ़ आवृत्ति, सूखा आवृत्ति, वर्षा परिवर्तनशीलता, तापमान प्रवृत्ति, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, कृषि उत्पादन, आपदा जोखिम प्रबंधन, जीआईएस आधारित विश्लेषण